वायस ऑफ पानीपत (कुलवन्त सिंह):- केंद्र सरकार की अमरुत योजना के तहत 98 करोड़ से शहर में 211.55 किलोमीटर में सीवर डालना है। जुलाई 2021 तक प्राेजेक्ट पूरा करना है, लेकिन पिछले दो साल में नगर निगम ने सिर्फ 45 फीसदी काम किया है। अब तक सिर्फ 82 किलोमीटर में सीवर लाइन बिछाई गई है। 129.55 किलोमीटर में सीवर अभी डालना बाकी है। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए निगम के पास 9 माह बचे हुए हैं।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सर्वे के लिए 6 जुलाई 2020 को एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई। जिसने 21 सितंबर को अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है। जिसमें पानीपत को पिछड़ा बताया है। कमेटी ने 31 अगस्त तक हुए काम की स्टेटस रिपोर्ट दी है। मामला इसलिए बड़ा है, क्योंकि आधे शहर में सीवर नहीं है। अब जब भारी-भरकम बजट से सीवर लाइन डालना है तो इसमें भी नगर निगम पीछे है। मामला इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अधिकांश बजट खर्च हो चुका है और कॉलाेनियों में काम अधूरे पड़े हैं।

एनजीटी को सौंपी गई मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में रोजाना 80.4 एमएलडी सीवरेज डिस्चार्ज यानी जेनरेट होता है। कमेटी ने शहर की आबादी 7,44,400 के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई है। शहर में वर्तमान में 253 किलोमीटर लंबे सीवर हैं। जिसकी सीवरेज क्षमता सिर्फ 45 एमएलडी है। इसलिए यह बड़ा मामला है।मामला इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि सीवर डालने के लिए डेढ़ साल से कॉलोनियों की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। वार्ड-3 को ही लीजिए। यहां की पार्षद अंजलि शर्मा ने कहा कि ठेकेदार पैसे ले गया, लेकिन काम अधूरा पड़ा है। एनजीटी के आदेश पर कमेटी ने हरियाणा के 34 शहरों की जनसंख्या और उसके अनुसार सीवरेज डिस्चार्ज की रिपोर्ट बनाई। पानीपत तीसरे स्थान पर है। इसके बाद भी यहां सीवर लाइन नहीं है।

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