हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पति को नौकरी छूटने के बाद भी पत्‍नी को देना होगा गुजारा भत्‍ता

वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा)
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पति और पत्‍नी के विवाद के मामले में बड़ा फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने पति और पत्‍नी के एक विवाद के मामले में फैसला दिया कि अगर पति की नौकरी छूट जाती है तो भी उसे पत्‍नी को गुजारा भत्‍ता देना होगा। कोर्ट ने कहा कि पति कोर्ट द्वारा तय भरण-पोषण राशि पत्‍नी को देने के लिए बाध्य है।
बता दें कि एक व्‍यक्ति ने खुद से अलग रह रही पत्‍नी को अदालत द्वारा 6000 रुपये प्रति माह का गुजरा भत्‍ता देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दी थी। इसमें उसने अपनी नौकरी छूटने के आधार पर गुजारा भत्‍ता देने से छूट मांगी थी। पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ‘अंडर सेक्शन 18 ऑफ द प्रोटेक्शन ऑफ वूमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005’ के तहत उस आदेश को रद करने की मांग की थी। निचली अदालत ने उसे अपनी पत्नी को प्रतिमाह 6000 रुपये देने का आदेश दिया था।


मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पति जो राशि अपनी पत्‍नी को दे रहा है वह तो घर के किराये में चली जाती है। पत्‍नी पर एक बेटी की भी जिम्‍मेदारी है। उसको भरण-पोषण के लिए कोई अन्य राशि पति की तरफ से नहीं दी जा रही। सुनवाई के दौरान पति की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उसकी अब नौकरी छूट गई हैं, इसलिए वह यह राशि देने में असमर्थ है।


इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि याची व्‍यक्ति पढ़ा लिखा है। ऐसे में उसकी भरण-पोषण राशि देने के आदेश रद करने की मांग उचित नहीं है। वह यह जो राशि दे रहा हैं वो तो घर के किराये में चली जाती है। उसकी पत्नी घर का खर्च व बच्ची का पालन भी कर रही है। ऐसे में किसी भी सूरत में चाहे पति की नौकरी छूट गई हो उसे कोर्ट द्वारा तय भरण-पोषण राशि देनी ही होगी। कोर्ट ने कहा कि 200 रुपये रोजाना कोई इतनी बड़ी राशि भी नहीं कि एक वह न दे सके…सोर्स जागरण
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