राहुल गांधी के दरबार में पहुंची हरियाणा के कांग्रेसियों की लड़ाई, गाली प्रकरण में अशोक तंवर पर घेरा कसा

वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा)
हरियाणा में कांग्रेस की कलह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर को हटाने के लिए हाईकमान पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस के 17 विधायकों में से 13 तंवर को हटाने के हक में हैं। यह सभी विधायक हुड्डा खेमे के हैं। अगले एक पखवाड़े में यदि तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया गया तो हुड्डा समर्थक विधायक कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हुड्डा समर्थक इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इसकी नींव 9 जून को दिल्ली में होने वाली हुड्डा समर्थकों की खास बैठक में पड़ सकती है।


10 साल तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 9 जून को दिल्ली में अपने खास समर्थकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक को हालांकि लोकसभा चुनाव में हुई हार की समीक्षा करने और विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में पेश किया जा रहा है। मगर हुड्डा समर्थक विधायक अशोक तंवर के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित करने के साथ ही सर्वसम्मति से उन्हें पद से हटाने की मांग कर सकते हैं।
हुड्डा समर्थक विधायकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में संगठन की कमी के कारण पार्टी की हार हुई है। इसका ठीकरा अशोक तंवर के सिर फोड़ा जा रहा है। तंवर के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव इसलिए लाया जा सकता है, क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने नई दिल्ली में कांग्रेस की बैठक के बाद राई से विधायक जयतीर्थ दहिया को गालियां दी हैं।
हुड्डा समर्थकों की घेराबंदी में फंसे अशोक तंवर ने अपने पद से इस्तीफा देने की बजाय यहां तक कह दिया कि उन्हें गोली मार दो, लेकिन हुड्डा समर्थक तंवर के इस बयान को इमोशनल ड्रामा करार दे रहे हैं। उनकी दलील है कि तंवर के ऐसा कहने से संगठन का भला नहीं होने वाला है, क्योंकि पिछले साढ़े चार साल में तंवर न तो जिला अध्यक्षों की घोषणा कर पाए और न ही ब्लाक प्रधान नियुक्त कर सके।


हुड्डा समर्थक कुछ नेता कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी से भी खुश नहीं हैं। हालांकि किरण को कई मौकों पर हुड्डा के खेमे में खड़ा देखा गया है, लेकिन उन पर तंवर खेमे की छाप लगी हुई है।
हुड्डा समर्थक विधायक तंवर के विरुद्ध राई से एमएलए जयतीर्थ दहिया की उस शिकायत को ढाल बना रहे हैं, जो उन्होंने राहुल गांधी को भेजी है। राहुल गांधी को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद अशोक तंवर ने उन्हें गालियां दी। जब वह उन्हें पकडऩे के लिए दौड़े तो तंवर गाड़ी भगा ले गए। दहिया ने अपनी शिकायत में पुराना कांग्रेसी होने का दावा करते हुए सवाल पूछा है कि अब उन्हें क्या करना चाहिए। वह कांग्रेस में रहें अथवा पार्टी से किनारा कर लें।
पार्टी हाईकमान राज्य के कांग्रेसियों की इस लड़ाई से बेहद असहज महसूस कर रहे है। राज्य में कांग्रेस आधा दर्जन गुटों में बंटी हुई है। रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्‍नोई और कुमारी सैलजा का अलग गुट है, जबकि तंवर गुट के साथ किरण चौधरी, कैप्टन अजय यादव और अवतार सिंह भड़ाना खड़े हैं। बाकी नेता हुड्डा खेमे के गिने जाते हैं। हालांकि नए प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा के नाम चल रहे हैं। मगर जब तक राहुल गांधी के खुद के इस्तीफे का फैसला नहीं हो जाता, तब तक राज्य के कांग्रेसियों का विवाद निपटने के कोई आसार नहीं हैं। सोर्स जागरण
TEAM VOICE OF PANIPAT

 

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