वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा)

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से जुड़े दसवीं और बारहवीं के करीब एक लाख विद्यार्थियों के रोल नंबर जारी नहीं किए,विधानसभा में यह मुद्दा गूंजा तो सरकार की हालत बैकफुट पर आने जैसी हो गई। जिसके बाद सरकार को कहना पड़ा कि किसी भी विद्यार्थी का रोल नंबर नहीं रोका जाएगा और वह बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा दे सकेगा।

वहीं राज्य के करीब एक हजार प्राइवेट स्कूलों के उन एक लाख विद्यार्थियों के रोल नंबर रोके लिए थे, जिन स्कूलों के शिक्षकों ने बोर्ड की परीक्षा ड्यूटी करने से मना कर दिया था। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने प्रेस कान्फ्रेंस कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मनमानी करने के आरोप लगाए थे।

कुलभूषण शर्मा ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों ने इसलिए परीक्षा ड्यूटी करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें पिछले कई बार के मानदेय नहीं दिए गए। ऐसे शिक्षकों को चिन्हित कर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने ड्यूटी नहीं करने वाले प्राइवेट शिक्षकों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना जड़ दिया और बच्चों के रोल नंबर रोक लिए।

बता दें कि हरियाणा की पूर्व शिक्षा मंत्री और झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने विधानसभा में यह मामला उठाया तो सरकार बैकफुट पर आ गई। गीता भुक्कल ने कहा कि दसवीं और बारहवीं के छात्र रोल नंबर के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं और सरकार  भय व तनाव रहित परीक्षाओं के आयोजन का नाटक कर रही है। गीता भुक्कल ने कहा कि यदि किसी प्राइवेट शिक्षक को मानदेय नहीं मिलेगा तो वह ड्यूटी क्यों करेगा, लेकिन इस आधार पर बच्चों के रोल नंबर रोक लेने तथा शिक्षकों पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाने का क्या औचित्य है।

विधानसभा में मामला उठने के बाद हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षकों पर दबाव बनाने के लिए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, क्योंकि परीक्षा सिर्फ सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी से संपन्न नहीं हो सकती। सरकार ने ऐसे प्राइवेट स्कूलों व शिक्षकों पर सिर्फ दबाव बनाने के लिए यह निर्णय लिया था।

TEAM VOICE OF PANIPAT……

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