वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा)

इंद्री से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक राम कुमार कश्यप क्या आने वाले समय मे जन प्रतिनिधी नियम,दलबदल कानून या बीच ऑफ ट्रस्ट व हेराफेरी से लाभ का पद अर्जित करने के मामले में कही विवादों में आ सकते हैं? यह प्रश्न इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि राम कुमार कश्यप इनेलो से राज्यसभा सांसद बने…इनेलो पार्टी से राज्यसभा सांसद थे…लगभग 1 साल उनका कार्यकाल बचा हुआ था..पिछले दिनों वो भारतीय जनता पार्टी में चुनावों से पहले शामिल हो गए थे और भाजपा की टिकट पर इंद्री से चुनाव लड़ा…उन्होंने विधायक बनने के बाद ही अपना इस्तीफा दिया..और 5 नवंबर को उनका इस्तीफा मंजूर किया गया…

चर्चा है कि रामकुमार कश्यप ने बतौर इनेलो राज्यसभा संसद भी सविंधान की कसम खाई थी…अब 4 नवम्बर को हरियाणा विधानसभा में बतौर भाजपा विधायक शपथ ली व उसके बाद राज्यसभा में इस्तीफा भेजा…जो 5 नवम्बर को ही स्वीकार कर लिया गया…

ये मामला इसलिए तूल पकड़ रहा है..क्योंकि रामकुमार कश्यप ने इंद्री में विधानसभा चुनावों में इनेलो के राज्यसभा सांसद होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी चुनाव लड़े व जन प्रतिनिधी नियम,दलबदल कानून या बीच ऑफ ट्रस्ट व हेराफेरी के आरोप खड़े हो चुके हैं…

यह कानूनी पहलू आने वाले दिनो में कश्यप के लिए सिरदर्द पैदा कर सकते हैं…इंद्री से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक राम कुमार कश्यप क्या आने वाले समय मे जन प्रतिनिधी नियम,दलबदल कानून या बीच ऑफ ट्रस्ट व हेराफेरी से लाभ का पद अर्जित करने के मामले में कही विवादों में आ सकते हैं? ये प्रश्न इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि राम कुमार कश्यप इनेलो से राज्यसभा सांसद बने…

यह कानूनी पहलू आने वाले दिनों ने कश्यप के लिए सिरदर्द पैदा कर सकते हैं…क्या रामकुमार कश्यप पर एंटी डिफ़ेक्शन क़ानून लागू होता है या नहीं ये फ़िलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है..

TEAM VOICE OF PANIPAT

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