वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा) हरियाणा सरकार ने सहायता प्राप्त गैर-सरकारी विद्यालयों से 28 जुलाई, 1988 से 10 मई, 1998 तक की अवधि के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मियों को पंडित दीन दयाल उपाध्याय मानदेय योजना के माध्यम से मासिक पैंशन देने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार के इस फैसले के तहत ऐसे स्कूलों के सेवानिवृत्त प्राचार्य को 20,000 रुपए, मुख्याध्यापक को 18,000 रुपए, प्राध्यापक को 16,000 रुपए, अध्यापक/हिन्दी/पंजाबी/संस्कृत/उर्दू अध्यापक को 14,000 रुपए, जेबीटी/कला अध्यापक/पीटीआई/कटिंग एवं टेलरिंग अध्यापक को 12,000 रुपए, नॉन टीचिंग स्टाफ (तृतीय श्रेणी) को 11,000 रुपए और नॉन टीचिंग स्टाफ (चतुर्थ श्रेणी) को 6,000 रुपए मासिक पेंशन दी जाएगी। इस फैसले से लगभग 352 कर्मियों को फायदा होगा। यह पेंशन लाभ इन कर्मियों को आजीवन उपलब्ध होगा तथा म़त्यु के बाद किसी अन्य उत्तराधिकारी को नहीं दिया जाएगा।

सरकार के फैसले से 352 कर्मचारी लाभान्वित होंगे। इस समय ये सेवानिवृत्त कर्मचारी वृद्धावस्था में बिना किसी वित्तीय सुरक्षा के अपनी आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। मासिक मानदेय का लाभ उसी अधिकारी एवं कर्मचारी को मिलेगा, जो स्कूल से सेवानिवृत्ति के समय स्वीकृत पदों पर 10 वर्ष की न्यूनतम योग्यता सेवा की शर्त पूरी करते होंगे।

यह मानदेय सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु तक प्रदान किया जाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु उपरांत उसके आश्रित या कानूनी उत्तराधिकारी को किसी भी परिस्थिति में किसी भी स्तर पर इस लाभ के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। मानदेय राशि का भुगतान केवल उन्हीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किया जाएगा जो किसी अन्य स्रोत या सेवानिवृत्त पेंशन का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।

यह नीति पहली जनवरी 2019 से प्रभावी होगी। मानदेय प्राप्त करने के लिए पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपने आवेदन शपथ पत्र सहित नियम एवं शर्तों का उल्लेख करते हुए संबंधित गैर-सरकारी स्कूलों के प्रबंधन मंडल को भेजने होंगे। वे उसे अपनी सिफारिशों के साथ संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी या जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। उन्हें यह लिखित में देना होगा कि वे भविष्य में इस मानदेय राशि को बढ़ाने के लिए नहीं कहेंगे।

TEAM VOICE OF PANIPAT

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