वायस ऑफ पानीपत (देवेंद्र शर्मा):- हरियाणा की पंचायतीराज व्यवस्था में परिवर्तन होने जा रहा है। हरियाणा में काम न करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को वापस घर बैठाने की पॉवर ग्रामीणों के पास होगी। इसी तरह हर दूसरे गांव की सरपंच महिला होगी जोकि ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के लिए क्रांतिकारी कदम होगा। हरियाणा विधानसभा सत्र में बिल लाकर इस पर चर्चा की जाएगी। 

हरियाणा का विकास एवं पंचायत विभाग इस बिल का ड्रॉफ्ट तैयार कर चुका है। इसी मानसून सत्र में इस विधेयक को पास कराने की कोशिश है, जो पंचायत एवं ग्र्रामीण विकास मंत्री के नाते डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की देखरेख में तैयार हुआ है। अगले साल फरवरी में प्रस्तावित पंचायती राज संस्थाओं पर यह कानून लागू होगा। मध्य प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक के अलावा दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह कानून लागू है। राइट-टू-रिकॉल कानून में गांव के कुल मतदाताओं में से एक तिहाई बैठक बुलाकर सरपंच को हटाने का प्रस्ताव ला सकेंगे। पंचायती राज के सीईओ एक माह की अवधि में गांव में दोबारा वोटिंग की तारीख तय करेंगे। कुल मतदाताओं का 60% हिस्सा यदि सरपंच के खिलाफ मत देगा तो सरपंच को पद से हटाया जा सकेगा। इसके लिए सरकार पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करेगी।


हरियाणा में सरपंचों के चुनाव सीधे होते हैं। यानी सरपंच का फैसला संबंधित गांव के वोटर ही करते हैं। ऐसे में उन्हेंं हटाने का अधिकार भी मतदाताओं को ही मिलेगा। जिला परिषद व पंचायत समिति में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का फैसला जिला पार्षद व पंचायत समिति सदस्यों द्वारा किया जाता है। ऐसे में जिला परिषद के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार जिला पार्षदों के पास ही रहेगा। प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों में भी यह अधिकार चुने हुए वार्ड पार्षदों के पास ही था,लेकिन अब नगर निगमों में मेयर के सीधे चुनाव करवाए जाने के बाद पार्षदों के पास अविश्वास मत लाने का अधिकार नहीं है। ग्राम पंचायतों में यह फैसला लागू और सफल रहने के बाद सरकार निकायों में भी इसी तरह राइट-टू-रिकॉल कानून लागू कर सकती है। 

TEAM VOICE OF PANIPAT

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