वॉइस ऑफ़ पानीपत  कुलवंत सिंह :-  इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की पानीपत स्थित रिफाइनरी से राहत देने वाली खबर है। रिफाइनरी अब विषैली गैसें नहीं उगलेगी। इन गैसों से जैव ईंधन एथेनॉल बनाया जाएगा। प्रति वर्ष 10 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड को वातावरण में घुलने से रोका जा सकेगा।यही नहीं, यहां प्रति वर्ष उत्पादित होने वाला 7.26 करोड़ लीटर जैव ईंधन 18 करोड़ लीटर क्रूड ऑयल का विकल्प बनेगा। प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है। वर्ष भर में यह सक्रिय हो जाएगा। भारत विश्व का पहला देश बनने जा रहा है, जहां किसी रिफाइनरी में प्रदूषण नियंत्रण की ऐसी अत्याधुनिक युक्ति का उपयोग होगा। चीन ने रिफाइनरी में तो नहीं, किंतु स्टील उद्योग में इसे आजमाया है।

रिफाइनरी में क्रूड ऑयल का शोधन कर इससे पेट्रोल, डीजल और इसके बाद पोलिस्टर दाना बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में जो अनुपयोगी गैसें (ऑफ गैस) उत्सर्जित होती हैं, उन्हीं से अब एथेनॉल बनाया जाएगा। अब तक गन्ने के अवशेष, पराली और ऐसे ही अन्य बायोमास से एथेनॉल बनाने का काम होता था, किंतु विषैली गैसों से एथेनॉल बनाने की यह सबसे उन्नत तकनीक है। कार्बन डाई ऑक्साइड के अलावा तीन अन्य विषैली गैसों को एथेनॉल बनाने में खपाया जाएगा। 3जी एथेनॉल प्लांट से रोजाना सवा लाख लीटर एथेनॉल बनाने का लक्ष्य है।

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