प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पताल में कोरोना जांच के पैसे लेने क्या शुरू किए, सैंपलिंग भी कम हो गई और कोरोना के केस भी। हालत यह है कि जहां पहले सिविल अस्पताल में 100-150 लोगों की लंबी लाइन लगती थी, अब 8-10 लोग ही खड़े नजर आते हैं। सैंपलिंग के पैसे लगने लगे तो कोरोना के केस भी कम आने लगे। पहले कहां 190 केस आते थे, जो अब 43 के आसपास रह गए हैं।यह सुखद स्थिति नहीं है कि कोरोना कम हो गया। असल में जांच नहीं हो रही। सरकार ने 19 सितंबर से यह नियम लागू कर दिया कि बिना डॉक्टर की पर्ची पर कोरोना टेस्ट कराने के 250 से 1600 रुपए तक लगेंगे। लेकिन नए नियम से जरूरतमंदों की परेशानी बढ़ गई। क्योंकि निजी अस्पतालों में भी डॉक्टर आसानी से कहां देखते हैं। देखते भी हैं तो सिर्फ यह कह देते हैं कि कोरोना रिपोर्ट लेकर आओ।

अब बिना डॉक्टर की पर्ची के पैसे लगेंगे

सरकार ने 19 सितंबर से नियम लागू कर दिया कि डॉक्टर की पर्ची के बिना सरकारी अस्पताल में भी जांच कराने पर 1600 रुपए तक लगेंगे। यह नियम इसलिए बनाया कि दूसरे राज्य जाने वाले या दूसरी जगह से आने वाले को किसी ऑफिस में अगर कोरोना रिपोर्ट लाने को कहा जा रहा है तो ऐसे लोगों से जांच के बदले पैसे लिए जाएं।अब राेजाना औसतन 650 सैंपल हाे रहे हैं, जबकि 1 से 19 सितंबर तक 22450 सैंपल हुए यानी राेजाना औसतन 1181। इन 19 दिनाें में राेजाना 146 की औसत से 2788 पाॅजिटिव मिले। अब 20 से 27 सितंबर के दिनाें में सैंपलिंग घटने से केस भी घटकर राेजाना की 68 की औसत से 546 मिले।

वायस ऑफ पानीपत (कुलवन्त सिंह):-

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